ग्रेटर नोएडा में नल से सीवर का पानी, बच्चों की तबीयत बिगड़ी, प्रशासन कटघरे में

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से फैली बीमारी की घटना के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 सेक्टर से आई शिकायतों ने प्रशासन के दावों की हकीकत सामने रख दी है। यहां बीते तीन दिनों तक घरों में नलों से पीने के पानी के साथ सीवर का गंदा पानी मिला। पानी का रंग पीला था और उसमें तेज बदबू थी। इस पानी के इस्तेमाल के बाद कई घरों में बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ गई। स्थानीय निवासियों के मुताबिक अब तक कम से कम आठ लोग बीमार पड़ चुके हैं। मजबूरी में लोगों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा। यह मामला सिर्फ डेल्टा-1 तक सीमित नहीं है बल्कि नोएडा ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की उन तमाम सोसायटियों की तस्वीर दिखाता है जहां लोग वर्षों से प्राधिकरण के पानी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
RWA और निवासियों के गंभीर आरोप
डेल्टा-1 आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई। पिछले तीन दिनों तक जल विभाग में लगातार शिकायतें की गईं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष पंकज नागर का आरोप है कि पहले भी दूषित पानी की सप्लाई हो चुकी है और लोग बीमार पड़े हैं लेकिन हर बार अस्थायी मरम्मत कर मामले को दबा दिया जाता है। उनका कहना है कि केवल लीकेज ठीक करना समाधान नहीं है बल्कि पूरे सेक्टर की पाइपलाइन का तकनीकी ऑडिट जरूरी है। सेक्टर की निवासी रुक्मणी सिंह भाटी बताती हैं कि नल खोलते ही बदबू आती थी और बच्चों के पानी पीते ही पेट दर्द शुरू हो गया। लोगों का सवाल है कि अगर किसी की हालत ज्यादा बिगड़ जाती तो जिम्मेदारी कौन लेता। फिलहाल बीमार लोगों का इलाज निजी अस्पतालों में कराया गया है। प्रशासन की ओर से न तो इलाज का खर्च उठाया गया और न ही किसी मुआवजे की घोषणा की गई। हालांकि सेक्टर में मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच जरूर कराई जा रही है।

प्रशासनिक जांच और अधूरे भरोसे
इंदौर की घटना के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम डेल्टा-1 पहुंची। कई जगह खुदाई कर पेयजल और सीवर लाइनों की जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि एक स्थान पर पानी की लाइन में सीवर का पानी मिल रहा था जिसे तुरंत ठीक कर दिया गया। प्राधिकरण के अधिकारियों का दावा है कि ज्यादातर घरों में पानी साफ पाया गया है और फिलहाल सभी जगह साफ पानी की सप्लाई हो रही है। एसीईओ सुनील कुमार सिंह के अनुसार जहां तकनीकी खामी मिली उसे दूर कर दिया गया है और पानी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। वहीं एसीईओ अनिल कुमार का कहना है कि बीमार लोगों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और उनके ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। बावजूद इसके प्रशासन यह साफ नहीं कर पाया है कि जांच रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी। यही अनिश्चितता लोगों के डर और अविश्वास को और बढ़ा रही है।
नोएडा ग्रेटर नोएडा में गहराता जल संकट
डेल्टा-1 की घटना ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पुरानी चिंताओं को फिर जगा दिया है। कई बड़ी सोसायटियों के निवासी बताते हैं कि वे वर्षों से नल का पानी पीने से बच रहे हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लोग आरओ और बोतलबंद पानी पर हर महीने हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं। पुराने सेक्टरों में टीडीएस का स्तर 650 से ऊपर बताया जा रहा है जिससे बिना आरओ पानी पीना संभव नहीं। अनुमान है कि करीब 60 से 65 प्रतिशत परिवार नल का पानी सीधे नहीं पीते। जिम्मेदारी को लेकर भी भ्रम बना हुआ है। प्राधिकरण का कहना है कि सप्लाई दुरुस्त है और आंतरिक पाइपलाइन की जिम्मेदारी बिल्डर और सोसायटी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टीडीएस से पानी की सुरक्षा तय नहीं होती। बैक्टीरिया भारी धातुएं और रासायनिक प्रदूषण भी बड़ी समस्या हैं। पुरानी पाइपलाइनों की जर्जर हालत और लंबित जांच रिपोर्टों के बीच यह साफ है कि अगर समय रहते व्यापक ऑडिट और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो यह संकट आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकता है।